Tuesday, August 24, 2010

बूँद

एक बूँद को मुकम्मल जर्रे की तलाश है..
है प्यास उसकी आँखों में और बिखरने की आस है!!

रत जगे करके कुरेदना लाज़मी तस्वीर जेहन में..
लोगो से बेसक सुना था ये प्यार का एहसास है!!

वो कहने लगे है हमसे अब बिछ्ड़ेगे न कभी.. 
ऐ खुदा लगने लगा है क़यामत के दिन पास है!!

2 comments:

  1. for first two lines-hats off.....that one contains within all the philosophy of life,..mean of individual...&....query of inner...

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