Wednesday, September 8, 2010

उसकी आख़िरी चार लाइने..

छलका आँखों का पैमाना आज की रात..
साकी बनकर याद है आई आज की रात !!

रूहों के मिलने की जब थी कसमे खाई ..
फिर क्यों है आई तन्हाई आज की रात !!

1 comment:

  1. इन चार लाइनों में जो सिमटी है यू लगता है जैसे ,
    मयखाने के दरवाजे पर शहनाई है आपकी बात .............
    :) :) :) :) :) :)

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