Thursday, September 2, 2010

खामोश आईना..

तन्हा शामे किसी को आज भी मांगती है..
ऐ काश..
जाने वालो का रुख़ मोड़ दे कोई !! 
डर लगने लगता है झील के खामोश आईने से भी..
अपनी यादो की कंकड़ फेककर इसे तोड़ दे कोई !!

दीदार कर ल़ू इस ख़ुदा का ..
उस ख़ुदा से मिलने से पहले ..
या ख़ुदा..
इन टूटती साँसों को जोड़ दे कोई !!

सारे जहाँ का दर्द मुट्ठी में छुपा रखा है 
बीती बातो को.. काली रातो को.. जाती साँसों को..
और मुझको..
तन्हा छोड़ दे कोई !!

3 comments:

  1. dil ko chhuti hui poetry....some lines for u...try to understand wat i wanna say-----

    जो सुनना चाहते है
    आसमा के रोज का सूरज ;
    जिन्हें प्यारी है हर मौसम में
    सूरज की हर एक सजधज ;
    रोज की दोपहर का
    एक टुकड़ा ही सही ,
    उन चाहनेवालो की खातिर छोड़ दे कोई;

    ReplyDelete
  2. Kuch lines tumhare liye....
    Khud ke ander tumne bahut kuch chupa rakha hai....
    ab khulne do muthhiao ko, jeene do sanso ko..
    ye ek sukun bas rakho ki...
    marne se pehle jina sikha gaya hai koi.....

    ReplyDelete